भाई का भूत कहानी।

भाई का भूत कहानी - Bhai Ka Bhoot Horror Story In Hindi

Horror Story In Hindi – यश और कनक की मुलाकात एक कैफे में हुयी, कनक को देखकर यश उसे देखता ही रहा कनक की वो मुस्कराहट यश को भा गयी थी वो उसका दीवाना हो चूका था।

अगले कई दिनों तक यश उसी कॉफी शॉप में जाता रहा बस कनक को देखने के लिए। एक दिन यश ने मन बना ही लिया और वह सीधा कनक के सामने जा बैठा।

कनक – हेलो !

यश – हाय..!

कनक – मैं जानती हूँ की तुम यश हो और एक आईटी कम्पनी में काम करते हो और पिछले कुछ दिनों से मेरा पीछा भी कर रहे हो।

यश – तुम्हे ये सब कैसे पता चला?

कनक – वो मेरा सीक्रेट है वैसे भी बैठो कॉफी पीते है।

यश और कनक ने साथ में कॉफी पी और बात चित भी की, यश की खुशियों का ठिकाना ही नहीं था।

यश – कल कब मिलोगी।

कनक – इसी टाइम बिच पर।

यश – अपना नंबर तो देते जाओ।

कनक – कल मिलो तब देती हूँ।

अगले दिन कनक और यश बिच पर मिले।

यश – मुझे लगा तुम नहीं आओगी।

कनक – कैसे नहीं आउंगी तुमसे मिलना जो था।

यश यही सोच कर खुश था की कनक बस उससे मिलने आयी थी उन लोगो ने काफी समय साथ बिताया और जब शाम के 6:30 बज गए तो कनक के मोबाइल में अलार्म बजा।

कनक – मुझे अब जाना होगा।

यश – इतनी जल्दी।

कनक – हां.. वो मेरी फैमिली रेस्ट्रिक्शन है मेरा बड़ा भाई है.. चलो अब मैं चलती हूँ।

बस इतना बोलकर कनक वहा से चली गयी। अगले दिन वो दोनों कैफे में मिले और फिर शाम 6:30 बजे अलार्म बजा और कनक वहा से फिर निकल गयी। यश को ये बात बहुत अजीब लगने लगी। इसके बाद जब यश और कनक पार्क में मिले और जब 6:30 बजे अलार्म बजा तो यश ने कनक से कहा।

यश – अरे तुम अपने भैया से झूठ बोल दो की तुम अपने सहेली के शादी में हो।

कनक – नहीं मैं नहीं कर सकती भैया यहाँ आ जायेंगे और फिर सब गड़बड़ हो जाएगी।

इतना बोलकर कनक वहा से भाग गयी। कनक के बर्थडे पर यश आधी रात को उसके घर गया यश ने घंटी बजायी दरवाजा खुला और वहा कनक जैसी दिखने वाले एक लड़की खड़ी थी लड़को के कपडे में उसकी चाल ढाल बदली हुयी थी। यश ने लड़की को कनक समझ कर बोला।

यश – हैप्पी बर्थडे कनक।

लड़की – हे मैं कनक नहीं हूँ।

यश – क्या मजाक कर रही हो।

लड़की – बोला ना मैं कनक नहीं हूँ।

यश – अच्छा ठीक है मुझे एक हग तो दो।

यश ने कनक को हग करने की कोशिश की पर लड़की ने यश को जोर का तमाचा मारा।

लड़की – कितनी बार बोलू मैं कनक नहीं हूँ, कनक नहीं हूँ.. मैं उसका बड़ा भी हूँ (कविराज)

उसका बदला हुआ भाव देखकर यश घबड़ा गया।

लड़की – मैं जनता हूँ तू मेरी बहन से प्यार करता है और वो भी तुझसे प्यार करती है पर तुम दोनों कभी एक नहीं हो सकते.. कभी नहीं। क्योकि सूरज ढलते ही कनक के सरीर में मैं रहता हूँ उसका बड़ा भाई (कविराज) इसलिए अच्छा यही है की तू कनक को भूल जा और निकल जा यहाँ से.. निकल जा।

लड़की ने यश को धक्का मारकर घर से बहार निकाल दिया। उस रात यश कनक के घर के बहार खड़े होकर सोचता रहा की आखिर उसके साथ हुआ क्या वो परेशान था। वो जिस लड़की से प्यार करता था उसके शरीर में एक भूत रहता है।

अगली सुबह सूरज उगते ही कनक रोते हुए उसके पास आयी।

यश – ये सब क्या है?

कनक – तुम घर चलो सब कुछ बताती हूँ ?

यश कनक के रूम में बैठा था और कनक अपनी कहानी बताने लगी।

यह उस समय की बात है जब मैं और मेरे बड़े भैया कविराज एक पहाड़ पर गए थे हम दोनों लगभग 14-15 साल के थे मुझे उचाई से बहुत डर लगता था मैं घबड़ायी हुयी थी भैया ने मुझे डराने के लिए पीछे से (भो) किया और अचानक मेरा संतुलन बिगड़ गया और वो पहाड़ से निचे गिर गए।

उस दिन से उनकी आत्मा रोज शाम सूरज ढलते ही मेरे शरीर में घुस जाती है मैं दिन में लड़की की तरह रहती हूँ और रात में लड़के की तरह मेरे माँ-बाप को ये बात पता थी उन्होंने कई कोशिशे की भैया की आत्मा को मुक्ति दिलाने की पर कोशिश सफल नहीं हुयी।

यश – पर इसका कोई अंत हो होगा।

कनक – अंत है पर भैया मुझे वो करने नहीं देंगे।

यश – पर क्या?

कनक – पूर्णिमा की रात भैया की आत्मा मेरे शरीर में नहीं घुश सकती उस रात हमें पुरानी मंदिर में जाकर भैया की आत्मा को मुक्ति दिलानी होगी।

यश – यह इतना मुश्किल तो नहीं लग रहा है।

कनक – मुश्किल ये है की भैया वो रात मुझे घर के बहार जाने ही नहीं देते।

यश – इस बार मैं तुम्हे ले जाऊंगा पुराने मंदिर।

इस दिन के बाद यश पूर्णिमा का बेसबरी से इंतजार करने लगा यश ने एक पंडित जी से बात भी कर रखी थी।

यश – क्या वो दुष्ट आत्मा कनक को मुझे यहाँ लाने देगी।

पंडित – मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं, यह भोलेनाथ की बिभूति है अघोरियों की तपस्या से सिद्ध इसके सामने वो दुष्ट शक्ति कुछ नहीं कर पायेगी यह तुम अपने शरीर पर लगा लेना और उस लड़की के शरीर पर भी।

आखिर पूर्णिमा की रात आ ही गयी। यश कनक को लेने उसके घर आया पर जैसे ही उसने कनक को हाथ लगाया किसी अदृश्य सी शक्ति ने उसे पटक दिया।

यश – कनक चलो.. चलो मेरे साथ।

कनक – भैया यही है वो मुझे नहीं जाने देंगे तुम जाओ यहाँ से चले जाओ मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो।

यश घर के बाहर गया और कुछ देर बाद अपने शरीर पर विभूति लगाकर वापस लौटा यश ने विभूति कनक के माथे पर भी लगा दी।

यश – मुझे पता था की ऐसा भी कुछ होगा इसलिए मैंने इसका भी इंतजाम कर लिया था।

यश ने कनक को कार में बैठाया और वो कार चलाने लगा, कार के मिरर से कनक को काली शक्ति दिखाई दे रही थी।

कनक – भैया हमारा पीछा कर रहे है।

यश – तुम घबड़ाओ मत वो हमारा कुछ नहीं कर सकते।

वो दोनों पुराने मंदिर पहुंच गए और पंडित जी ने दोनों को एक घेरे में बिठा दिया जैसे-जैसे पंडित जी मन्त्र पढ़ते जा रहे थे एक काली शक्ति वहा आस-पास घूमने लगी वह काली शक्ति ने एक रूप ले लिया।

काली शक्ति – कनक तुम मुझे मरना चाहती हो।

कनक – नहीं भैया (रोते हुए बोली)

पंडित – कनक उसके बातो पर ध्यान मत दो वो तुम्हे बहका रहा है।

पंडित मन्त्र पढ़ता गया और कविराज की आत्मा तड़पती गयी कनक रो रही थी। आखिर पंडित ने कविराज की आत्मा को मुक्ति दिलवा ही दी पर कनक अब भी रोये जा रही थी यश ने उसे संभाला।

यश – तुम्हारे भैया अब वहा चले गए जहा उन्हें होना चाहिए।

उस दिन के बाद कनक के शरीर में कविराज कभी नहीं आया और फिर कनक और यश ने शादी कर ली और फिर वो दोनों हमेशा खुशी खुशी रहने लगे।


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